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 तन्हाई से यारी थी


तन्हाई से यारी थी महफिल मेरी यूं वीरान थी अपनों में खड़ा था मैं फिर भी तन्हाई थी

Tanhai se yari thi mahfil Meri Yun veeran thi apnon mein khada tha Main fir bhi tanhai thi


एक अके तन्हाई पर दिल छू लेने वाली हिंदी शायरी – तन्हाई से यारी थी महफ़िल मेरी यूँ वीरान थी अपनों में खड़ा था मैं फिर भी तन्हाई थी।



ये शायरी उस एहसास को पकड़ती है जहाँ इंसान भीड़ में भी अकेला महसूस करता है। महफ़िल की रौनक भी दिल की वीरानी को नहीं मिटा पाती।