mere apne alfaz


कुछ जख्म इस तरह से मिले हैं मुझे जख्मी हू पर जख्म दिखते नहीं मेरे

Kuchh  jakhm  is tarah Se mile hain mujhe jakhmi hun per jakhm dikhte nahi mere


यह शायरी उन अदृश्य दर्दों की कहानी है जो बाहर से दिखाई नहीं देते, लेकिन भीतर गहराई तक असर करते हैं। लेखक ने यह भाव व्यक्त किया है कि ज़िंदगी में ऐसे घाव भी मिलते हैं जो शरीर पर निशान नहीं छोड़ते, पर दिल और आत्मा को हर पल चुभते रहते हैं।  

- ✨ मुख्य भाव: अदृश्य ज़ख़्म और भीतर का दर्द  
- 💔 संदेश: हर इंसान के पास कुछ ऐसे घाव होते हैं जिन्हें वह दुनिया से छुपा लेता है