प्रस्तुतकर्ता
rubina khan
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एक वक़्त था तेरे साथ के लिए हम बहाने ढूँढते थे,
आज वक़्त है, साथ है, पर बहाने नहीं हैं…
सिर्फ़ बिरानी का साया है।
यह शायरी रिश्तों की बदलती नज़ाकत और समय के साथ भावनाओं के बदलने को दर्शाती है।
पहले जहाँ मिलने के लिए बहाने बनाए जाते थे, अब वही साथ होते हुए भी दूरी महसूस होती है।
यही है दिल को छू लेने वाली सच्चाई — साथ होते हुए भी बिरानी का एहसास।